
इंट्रो: तो मतलब, इंडिया ने कपड़े भी बना दिए क्या?
ऐसा ही हफ्ता है जब कोई हाई-एंड फैशन ब्रांड कुछ “नया” लॉन्च करता है—जैसे वो “न्यू-एज रैप पैंट”, जो एक पतली सी लाइन पर धोती बन जाती है, वैसे ही जैसे आपके दादाजी ने शादी में पहनी थी। और फिर शुरू हो जाता है हर भारतीय इन्फ्लुएंसर का गुस्से वाला रील, रीट्वीट्स, और “कल्चरल अप्रोप्रिएशन” ड्रामा जैसे कोई ओटीटी डॉक्यूमेंट्री का ऑडिशन चल रहा हो।
News इस हफ्ते एक दुखी भारतीय फैशन इन्फ्लुएंसर ने एक इंटरनेशनल ब्रांड पर “इंडियन हेरिटेज को चोरी करके हाउते क्यूचर” बना देने का आरोप लगाया। सही भी है लेकिन बार-बार ये देखकर हैरानी होना कमाल है। इतिहास यही तो सिखाता है: हम बनाते हैं, वो बेचते हैं, और हम ऑनलाइन चिल्लाते हैं। और फिर ये साइकिल hashtags, memes, और एक ओवरप्राइज़्ड कॉफी के साथ फिर शुरू हो जाती है।
धोती जिसने रैंप वॉक किया जैसे वो 300 BC से कभी थी ही नहीं
सबसे पहले, आज का सुपरस्टार धोती। कभी स्वतंत्रता सेनानी, नेता, संत, और हर उस अंकल का फेवरेट जो फैशन में जीरो इन्वेस्ट करता था, अब वही धोती “लक्ज़री स्ट्रीटवियर” बन गई है। इंटरनेशनल ब्रांड (नाम नहीं लेंगे, पर “Fiore” सा राइम करता है) ने एक चादर मॉडल पर लपेटी, बेल्ट लगाई, और इसके लिए तीन महीने का किराया मांग लिया।
प्लॉट ट्विस्ट: वो बिक भी गई।
क्योंकि अगर कोई मॉडल इसे pout, tan, और सही लाइटिंग के साथ पहने तो वो “avant-garde” हो जाता है। आपका दादाजी पहनें तो वो “गांववाले अंकल” हो जाते हैं।
फैशन, साहब, सिर्फ क्लासPrivilege है, बस PR अच्छा चाहिए।
News इन्फ्लुएंसर की गुस्से भरी इंस्टाग्राम पोस्ट जो उसने ब्रांडेड स्किनकेयर प्रमोस के दरम्यान लिखी थी—को “इंडियन हेरिटेज की चोरी” कहा गया। कमेंट्स से इंटरनेट फट पड़ा:
- “कोई तो बोला!”
- “पहले हमारे मसाले, अब हमारा स्टाइल।”
- और क्लासिक: “फॉरेन ब्रांड्स का बहिष्कार।” (टाइप किया, ज़ाहिर है, विदेशी ब्रांड पहन कर।)
वाह, क्या पोएटिक सिचुएशन है।
कलोनियल इतिहास फिर रिपीट हो रहा है, लेकिन इस बार ये लिनन में है।
कल्चरल अप्रोप्रिएशन या सिर्फ आलसी इंस्पिरेशन? डिसाइड आप करें

चलो ड्रामा को खोलते हैं (कम आईलाइनर के साथ, प्रॉमिस). हर कुछ महीने, लक्ज़री ब्रांड्स को “ईस्ट” से इंस्पिरेशन मिलती है: साड़ी, बिंदी, कुर्ता, या अब धोती। फिर उसपर इंग्लिश नाम चिपका देते हैं, इटली में बनाते हैं, और प्रेस नोट जारी करते हैं “इंस्पायर्ड बाय द ईस्ट।”
इंस्पिरेशन मतलब बस चोरी, बस फॉन्ट्स अच्छे हो जाएं।
अब तक के हमारे सबसे WTF फैशन मोमेंट्स:
- “बोहो रैप ट्राउज़र्स” जो धोती ही हैं, बस Shaadi Season 101 स्किप कर दिया।
- “योगा इंस्पायर्ड मेडिटेशन रोब्स” जो हॉस्टल वाली कुर्ता के जस्से लगते हैं।
- “ट्राइबल चिक एम्ब्रॉयडरी” जो असल में कश्मीरी फुलकारी है, पर अब $1200 में बिकती है।
News इन्फ्लुएंसर्स ने तो पूरी लड़ाई छेड़ दी ट्विटर थ्रेड्स, यूट्यूब एक्सप्लेनर्स, “धोती vs Dior” पॉडकास्ट। एक ने तो स्लो-मोशन रील बना दी, धोती पहन कर, 2010 बॉलीवुड BGM के साथ। इतनी कॉन्फिडेंस तो क्रिप्टो बॉयज़ में भी नहीं थी।
असल बात कहीं गुस्से और फिल्टर के बीच दबी है: ग्लोबल फैशन ये क्यों मानता है कि हिस्ट्री तभी शुरू होती है जब वो इसे इंस्टा पर पोस्ट करता है?
और यहां देसी मिलेनियल्स किराया देने में लगे हुए
जब दुनिया के ब्रांड्स हमारी कल्चरल DNA को लेकर लड़ रहे हैं, हम बाकी लोग तो बस सोच रहे हैं क्या inflation को कार्डियो गिन लें। जब करोड़पति ब्रांड्स हमारे फैशन की जड़ों की बहस करते हैं, ये वैसा ही है जैसे दो एक्स-GF/BF पुराने hoodie पर लड़ रहे हों।
इरनी? हममें से आधे लोग धोती पहनेंगे ही नहीं। इंस्टाग्राम पर बचाव करेंगे, पर बाहर पहनना? “भाई, मैं तो अपने बिहार वाले अंकल जैसा दिखूंगा!”
और असल में, वेस्ट ने धोती चोरी नहीं की। बस रिब्रांड कर दी जिसे हम खुद ही भूल बैठे थे। असली #Colonial Hangover यही है कि हमें धोती cool लगे तभी जब Dior उसे approve करे।
कहीं तो हमारे पूर्वज सिर हिला रहे हैं “बेटा, कम से कम प्रेस तो कर रहे हैं।”
इंडियन फैशन कंटेंट क्रिएटर टॉडलिस्ट (Gen Z एडिशन):
- स्टेप 1: कल्चरल चोरी पर गुस्सा।
- स्टेप 2: अगले ही हफ्ते किसी विदेशी ब्रांड से कोलाब।
- स्टेप 3: “ग्रेटफुल फॉर दिस जर्नी” वाला कैप्शन डालो।
- स्टेप 4: मंगलवार तक कैपिटलिज़्म को blame करो।
News वैसे ये ड्रामा इंटरनेट को कंटेंट देता है आखिर, मेन बात सिर्फ एंगेजमेंट की है। जस्टिस? छोड़ो, मीम बनाओ।
“Colonialism, मगर एकदम aesthetic”
फैशन को एक्सोटिसिज़ करना बहुत पसंद है। ये इतिहास की पुरानी आदत है। ट्राइबल प्रिंट्स से लेकर “नोमैडिक सिलुएट्स”, हर जगह “फर-अवे लैंड” वाली फिल आ जाती है जहां हैंडमेड मैकरमे मिलता है।
रियलिटी: वो दूर की जगह इंडिया ही है, और हम तो सालों से सरोजिनी मार्केट से शॉपिंग करते हैं।
अगर सच में कुछ करना है तो हमें अपनी chaos को copyright कर देना चाहिए। जुगाड़ स्टाइल को पेटेंट कर दो। “chaotic layering” भेज दो Milan के mood-board में।
आगे क्या? अगला ट्रेंड Gucci लाएगा The Great Indian Plastic Chair Collection.
और वेस्ट उसे फटाफट खरीद लेगा। क्योंकि इंडिया सिर्फ देश नहीं रहा, एक रियल content theme बन गया है।
इमेज प्लेसहोल्डर:
(इमेज आइडिया): एक meme जिसमें कोई अंकल धोती में, कैप्शन: “Dior कर ही नहीं सकता।”
उधर, रियलिटी में, कोई पेरिस डिज़ाइनर लुंगी को “रिज़ॉर्ट वियर” कह रहा है। अगर irony पे tax लगे तो हमारी स्टूडेंट लोन फ्री।
आगे क्या? (हैशटैग के अलावा)
अगर आप यहां तक आए बिना rage-tweet किए, congratulations अब आप पूरी तरह self-aware हैं। असली मुद्दा सिर्फ फैशन चोरी नहीं, वो attitude है कि इंडिया की culture सिर्फ एक ओपन Google Drive फोल्डर जैसी है। सब ठीक है जब कोई उसे profit न बना रहा हो, वरना “ऑवर लीगेसी” का राग लग जाता है।
शायद वक्त आ गया है कि हम अपनी heritage को खुद ही जिन्दा करें, इससे पहले कि कोई यूरोप में फिर से “discover” कर ले।
माना ये dhoti drama जाएगा, कोई नया इन्फ्लुएंसर “कॉपीकैट” बोलेगा, और इंटरनेट फिर अगली avocado toast या सेलेब डिवोर्स पर चला जाएगा। मगर pride और panic के बीच एक सच है इंडिया को credit नहीं मिलता, remix ज़रूर मिल जाता है।
इमेज प्लेसहोल्डर:
(इमेज आइडिया): एक sarcastic stock फोटो जिसमें कोई इंडियन इन्फ्लुएंसर luxury shopping bags के बीच, मैकबुक पर गुस्से में typing कर रहा हो।
निष्कर्ष: यहां तक पहुंचे? अच्छी हिम्मत है!
बधाई हो, Gandhi 2.0, आप यहां तक आ गए। फैशन colonialism, इन्फ्लुएंसर ड्रामा, और ओवरप्राइज़्ड लुंगी की पूरी कहानी पढ़ ली। अब अपने existential crisis को couture की तरह पहन लो कम से कम ये चीज़ कोई चुरा नहीं सकता।
और जाते-जाते याद रहे: अगर दुनिया आपकी culture चोरी करे, तो कम से कम उन्हें credit में टैग करने को बोलो। #DhotiRights #FashionDramaForever
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It’s Sagar —सरकारी और निजी नौकरियों से जुड़ी ताज़ा और भरोसेमंद जानकारी साझा करने वाला एक कंटेंट क्रिएटर। युवाओं तक सही नौकरी अपडेट पहुँचाना ही मेरा उद्देश्य है।